Wednesday, April 18, 2012

इश्क जो सीने में पनपे तो सूरत और निखरती है

हिम्मत को ग़र अक्ल मिले तो तख्तों पे जा चढ़ती है
हिम्मत हो या अक्ल हो लेकिन  हुस्न का पानी भरती है

मेरी ही अंदर की मुहब्बत बह गई शायद आँखों से
वर्ना चुपके-चुपके वो तो आज भी मुझपे मरती है

हम दिल की कर ही लेते हैं क़ुफ्र-ओ-सवाब के पर्दे में
और खुदा को ये लगता है दुनिया उस से डरती है

अच्छी शक्लों वाले सुन लें, जांचा परखा नुस्खा है
इश्क जो सीने में पनपे तो सूरत और निखरती है

अक्ल-ओ-हुनर भी होंगे लेकिन मेरे अब्बू कहते हैं
मेहनत करने वालों की तो क़िस्मत और संवरती है


Wednesday, March 28, 2012

मेरे घर की रौनक किसको याद नहीं है!!

उसके होते थी जो उसके बाद नहीं है
मेरे घर की रौनक किसको याद नहीं है!!

मुझको क़ैद में डालो जाने क्या कर बैठूं
पिंजरा टूट गया है और सय्याद नहीं है

उसकी अलमारी में इक तस्वीर मिली है
तुम कहते थे उसको कुछ भी याद नहीं है

मैं क्या चाहूं वह मुझसे बेहतर जाने है
मेरी कोई अर्ज़ी या फ़रियाद नहीं है

उसकी राहें तकते अरसा बीत गया है
क्यों तकता हूँ अब ये मुझको याद नहीं है




Wednesday, March 21, 2012

निगोड़ी अखियाँ

मेरे जिया की, मेरे पिया को, बतावें सारी, निगोड़ी अखियाँ
वो पूछ लेते,  हैं इनसे मोरी, सो रास्ते पे, हैं छोड़ी अखियाँ

वो कह गए थे, वो आ मिलेंगे, मैं बांवरी ही भटक गयी थी
मुझे जो मेले, में  मस्त देखा, उन्होंने मो से, हैं मोड़ी अखियाँ

बरसती आँखें, ज्यों सीप मोती, है शर्त इतनी, हो प्रीत गूढ़ी
सखी मिलें जो, पिया तो कहना, हुई हमारी, करोड़ी अखियाँ

मेरी हवस का, इलाज दुनिया, मगर ये दुनिया, है मर्ज़ भारी
वो मिल गए तो, बेमानी दुनिया, सो उनसे आखिर, में जोड़ी अखियाँ

Tuesday, February 28, 2012

चारदिवारी पर तो हमने कांच बिछाकर रखा है

सोच रहा हूँ काग़ा आखिर क्यों संदेसा लाएगा
चारदिवारी पर तो हमने कांच बिछाकर रखा है

देखें उसके चाहने वाले रीस कहाँ तक करते हैं
हमने छत पे उसकी ख़ातिर चाँद मंगाकर रखा है

सोहबत की तासीर से शायद क़ुदरत भी वाक़िफ ही थी
उसने दिल को ज़ेहन से थोड़ा दूर बिठाकर रखा है

इक दिन मैं अपने बेटे के नाम से जाना जाऊंगा
बाप ने दिल ही दिल में ये अरमान सजाकर रखा है

आखिर तक वो ना माना तो दिल का ज़ख्म दिखा दूंगा
आड़े वक़्त को तरकश में ये तीर छुपाकर रखा है

Monday, February 13, 2012

वो ख़्वाबों में भेस बदल कर आया है

उसने मुझको ऐसे भी अज़माया है
वो ख़्वाबों में भेस बदल कर आया है

मां डरती है बेटे जबसे मर्द हुए
मंझले ने कल उसपर हाथ उठाया है

बाप की गर्दन कंधे निग़ल गए सुनकर
बेटे ने पटवारी घर बुलवाया है

जाने क्या होता था  दही में, शक्कर में
कितनी बार तो मुझको पास कराया है

नीले रंग का कुर्ता सबके पास है पर
उसके वाला आसमान से आया है

Wednesday, February 1, 2012

Chaand Sitaare Milkar Use Sataate Honge

Chaand sitaare milkar use sataate honge
Usko mere naam se phool chidhaate honge
 
Aankhon ki wo jheelein bhar bhar aati hongi
Usko mere qisse log sunaate honge
 
Gusse pe na qaboo rehta hoga jab jab
Mere sher ko apna log bataate honge
 
Resham ke sirhaane bistar se girne par
Usko meri baahein yaad dilaate honge
 
Unke dil kaa bojha kuchh kam hota hoga
Wo jab apni jhooti qasmein khaate honge

Wednesday, January 25, 2012

Thodi Si Achhayi Se Tu Sadiyon Jaanaa Jaayega

Thodi si achhayi se tu sadiyon jaanaa jaayega
Andhon mein gar kaanaa hai tu raajaa maanaa jaayegaa

Thodi si achhayi se tu sadiyon jaanaa jaayega
Daur-e- giraawat mein tu uthh ja insaan maanaa jayegaa

Mera asla tera tamancha lekin khel adhoora hai
Unko bhi to karo ikathha jinpar taanaa jaayegaa

Galti na hojaye mujhse jaane ya anjaane mein
Mere kaam se mera saaraa kunba jaanaa jaayega

Bachhe ki jo zid hai to fir do gubbare le lo naa!
Warna ye bhi ro dega aur mera khaanaa jaayegaa

Aaj nahi parwaah kisko jis benoor haweli ki
Gir jaane ke baad isikaa malbaa chhaanaa jaayegaa