Thursday, February 2, 2017

ख़बर  सुनकर वो ये इतरा रहा है
मुझे उसका बिछोड़ा खा रहा है

मेरे सय्याद को कोई बुला दो
मेरे पिंजरे को तोड़ा जा रहा है

निकलना है हमें कब से सफ़र पर
मगर ये जिस्म आड़े आ रहा है

मैं उसको याद भी करना न चाहूँ
वो आकर ख़्वाब में उकसा  रहा है

चलो उसको अज़ीयत से निकालें
सुना  है अब भी वो पछता रहा है

Tuesday, October 18, 2016

मेरी मुश्किल करे आसान कोई
मुझे आकर करे हैरान कोई

ज़वाल ऐसा कि तुमको क्या बताएं
फ़रिश्ता हो गया इंसान कोई

निखरता जा रहा था रंग उसका
छिडकता जा रहा था जान कोई

मुझे दुनिया से यूँ आज़ाद करना
न बाक़ी छोड़ना पहचान कोई

अजी कुछ रोज़ के हैं चोचले फिर
हमें छोड़ आएगा शमशान कोई

बुरे हो तुम कि चाहत में तुम्हारी
मेरा निकला नहीं अरमान कोई

भुला देने की उसको ठान ली है
किया है काम कब आसान कोई


Wednesday, July 13, 2016

वो जो लिखा है सब किताबों में
 वो ही शामिल नहीं निसाबों में

उसकी  तासीर ऐसे काटी है
हमने घोला उसे शराबों में

ये मेरी हिचकियाँ बताती हैं
मैं बक़ाया हूँ कुछ हिसाबों में

तो कोई तजरुबा ही कर लें क्या
कुछ नहीं मिल रहा किताबों में

हम उसे यूं ही मिल गए होते
उसने ढूंढा नहीं ख़राबों में

आओ और आ के फिर बिछड़ बिछड़ जाओ
कुछ इज़ाफ़ा करो अज़ाबों में

और फिर बाग़ बाग़-बाग़ हुआ
एक काँटा खिला गुलाबों में


Friday, May 13, 2016

कई बार हमको मुहब्बत हुई
मगर तू भी दिल से न रुख़्सत हुई

तुझे सोचने बैठ जाता हूँ फिर
तुझे सोचने से जो फ़ुर्सत हुई

मुहब्बत के दुश्मन ख़बरदार हों
हुई फिर किसी को मुहब्बत हुई

चलन बन गया चाक-दामन मेरा
मेरी उस गली में वो इज़्ज़त हुई

वो अब चाहिए अब नहीं चाहिए
ये चाहत हुई या कि नफ़रत हुई


Thursday, January 14, 2016

जी हमी हैं मुहब्बत के मारे हुए
दिल के टूटे हुए जां से हारे हुए

जिन से बरसों की पहचान थी छुट गई
अजनबी आज से हम तुम्हारे हुए

इस ज़मीं को भी हम रास आए नही
हम वही हैं फ़लक़ से उतारे हुए

एक दिन आई दुनिया लिए अपने ग़म
हम भी बैठे थे दामन पसारे हुए

दिल जो टूटे नहीं ख़ाक में मिल गए
 दिल जो टूटे फ़लक़ के सितारे हुए

दोष सारा हमारे जुनूँ को न दो
उनकी जानिब से भी कुछ इशारे हुए

इक नज़र के तक़ाज़े पे सब ने कहा
हम तुम्हारे हुए  हम तुम्हारे हुए 

Thursday, October 8, 2015

सुनके ये टूटे हैं भरम सारे
उसके एहसान थे करम सारे

 इससे पहले कि मौत आ जाए
आप कर लीजिये सितम सारे

फिर मुहब्बत न मोहलतें मोहलतें देगी
दूर कर लीजिये वहम सारे

वक़्त चुन लेगा ज़ालिम-ओ-मज़लूम
हादिसे कीजिये रक़म सारे

Wednesday, September 16, 2015

ये अदा ये सुख़न बहाना है
हमको तो हाल-ए-दिल सुनाना है

मेरी मजबूरियाँ समझ मौला
छोड़ कर जिस्म मुझको आना है

ये मेरा जिस्म, और ये दुनिया
क़ैदख़ाने में क़ैदख़ाना है

मैं उसे बेवफ़ा नहीं कहता
ख़्वाब में अब भी आना-जाना है

इक मुनासिब सा दिन बता दीजे
हाल अपना हमें सुनाना है

हम भी देखेंगे उसकी आँखों में
हमको भी ज़ब्त आज़माना है
जब से इंसान कर दिया तूने
जिस्म ज़िन्दान  कर दिया तूने

ऐ मिलनसार और हसीं चेहरे
इश्क़ आसान कर दिया तूने

अश्क मोती हैं गर ये सच है तो
कितना नुक़सान कर दिया तूने

मेरे ईमान की हिफ़ाज़त कर
जब मुसलमान कर दिया तूने

फूल से ज़ख़्म बख़्श कर जानां
दिल को गुलदान कर दिया तूने

इस तरह उठ के मेरे पहलू से
मुझको वीरान कर दिया तूने

Friday, August 7, 2015

जब वो बोले कि कोई  प्यारा था
उनका मेरी तरफ इशारा था

हम निकल आये जिस्म से बाहर
उसने कुछ इस तरह पुकारा था

फेर देता था वो नज़र अपनी
हर नज़र का यही  उतारा था

रात देखा नहीं पर सुनते हैं
चाँद इक मुन्तज़िर हमारा था

मेरे अपने जलाते हैं मिलकर
मुझको जो जिस्म जां से प्यारा था

डूब जाना ही ठीक था मेरा
मेरे दोनों तरफ़ किनारा था


Wednesday, July 15, 2015

किसी मज़लूम की आहों की अब तासीर होना है
क़लम सुन ले तुझे इस दौर की  शमशीर होना है

मैं उसकी आँखों का काजल था उसने पोंछ ली आँखें
सो अबकी बार उसके पाऊँ की ज़ंजीर होना है

ये मुश्किल आपकी है आप आख़िर किसके होते हैं
हमे तो आपकी बस आपकी जागीर होना है

दुआएं मांगते हैं इसलिए अपने उजड़ने की
हमें तो यार तेरे हाथ से तामीर  होना है

हवा को क्या ख़बर आख़िर मैं इसको क्यों  बुलाता हूँ
मुझे अपनी उड़ाकर ख़ाक आलमगीर होना है

Thursday, May 28, 2015

तुम्हारी राह तकता हो कोई आँगन ज़रूरी है
मुहब्बत की कहानी में कोई बिरहन ज़रूरी है

धड़कता  दिल,ज़रा जुर्रत ये सब तो चाहिए लेकिन
मुहब्बत के लिए थोड़ा सा पागलपन ज़रूरी है

ज़रुरत कह रही थी मांग लूं लेकिन कहा दिल ने 
तुम्हारे हाथ में सोने का ये कंगन ज़रूरी है 

दबा ले अपनी हर हसरत तुम्हारा मान रखने को
तुम्हारी ज़िन्दगी में ऐसी इक जोगन ज़रूरी है

मनाने-रूठने की रस्म से ही प्यार है ज़िंदा 
हमारे बीच में होती है जो अनबन ज़रूरी है

Thursday, March 5, 2015

कहें आसां ज़बां में कुछ बड़ा अरमान होता है
मगर आसान कुछ कहना कहाँ आसान होता है

 तुम्हारे साथ गुज़रे पल गुहर हो जाते हैं जानां
चले आओ तुम्हारे बिन बड़ा नुकसान होता है

बलन्दी की तरफ़ जाते हुए मजमे हैं यारों के
उतरते वक़्त  रस्ता बड़ा सुनसान होता है

गुज़र जाते हैं बरसों इक भली आदत बनाने में
बुरी आदत लगा लेना बड़ा आसान होता है

ये ख़िदमत और ख़ुशामद चाहता; नख़रे दिखाता सा
ख़याल-ए-यार ऐसा है की ज्यों मेहमान होता है 

Monday, February 16, 2015

सौ  'आहें' और हज़ार 'वाहें'  

पुराने ज़ख्म  कुरेदो  तो दाद मिलती है 
खुद अपने बखिये  उधेड़ो तो दाद मिलती  है 

नपे -तुले  से ये मिसरे  कोई  कमाल  नहीं 
जो  इनपे  ख़ून  उड़ेलो  तो दाद मिलती है

 कभी -कभी  तो ये देखा  कि  सादा  मिसरे  की 
ज़रा  सी  बांह  मरोड़ो  तो दाद मिलती है

जदीदियत  को  हमारा  भी  वोट  है  लेकिन 
ग़ज़ल ; ग़ज़ल  की  सी  छेड़ो  तो दाद मिलती है

Wednesday, February 11, 2015

इतना न करो ग़म जो वचन टूट रहा है
वैसे भी अब वफ़ा का चलन टूट रहा है 

फिर आइयेगा आप कि वो मिल नहीं सकते
आराम की थकन है बदन टूट रहा है 

दुनिया मसाइल को जो हल करने चले थे
उनको ख़बर भी है कि वतन टूट रहा है 

तुमने तो फूल तोड़ के सूंघा, मसल दिया
इस हादिसे को देख चमन टूट रहा है

उस शोख़ पे मिसरा कोई कहने की हवस में
हम देख न पाये की कहन टूट रहा है

Thursday, January 29, 2015

 थाम ले आके जो सुनता हो दुहाई मेरी
बस तेरे हाथ में जंचती है कलाई मेरी

यूँ मेरे होने का दुनिया को पता मिलता है
उनसे कहना  कि करें और बुराई मेरी

याद-ए -माज़ी या तेरे ख़त से बहलता ही नहीं
दिल को कम पड़ने लगी यार कमाई मेरी

तेरा इक़रार मुझे सिर्फ तेरा कर देता
तेरे इंकार ने तो मांग बढ़ाई मेरी

तब कहीं जाके मेरे वज़्न का एहसास हुआ
लाश काँधे पे जो दुनिया  ने उठाई मेरी


Monday, December 8, 2014

कैकयी से तो क़ौल निभाया है हमने
सीता को बनवास दिलाया है हमने

हाथ हमारे कटकर गिरने हैं इक दिन
फूलों पर तेज़ाब गिराया है हमने

उसको पाया है तो इसमें हैरत क्या
आख़िर अपना-आप गंवाया है हमने

देखना पत्थर मोम सरीखा पिघलेगा
उसको अपना हाल सुनाया है हमने

औज़ारों को हाथ हमारे चुभते हैं
जबसे ये हथियार उठाया है हमने

Wednesday, October 1, 2014

हाँ मेरे ज़ख़्म भर गए लोगो
पर मेरे शौक़ मर गए लोगो

मैं तुम्हे देख कर ही बिगड़ा था
और तुम सब सुधर गए लोगो

सब हमें देखें इस क़वायद में
हर नज़र से उतर गए लोगो

उनके आने की सिर्फ़ अफ़वाह थी
और हम सज-संवर गए लोगो

उनके हाथों सिमटने की ज़िद मे
ख़ुद-ब-ख़ुद हम बिखर गए लोगो

Friday, September 5, 2014

सेहन में  यूँ उजाला कर लिया है
उन आँखों को सितारा कर लिया  है

हमे भर जाने से परहेज़ है, सो
छलक जाना गवारा कर लिया है

परी चेहरों! रहो तनहा कि हमने
मुहब्बत से किनारा कर लिया है

मज़े में हूँ ग़रीबी में भी जबसे
ज़रा छोटा निवाला कर लिया है

अरी यादो! चली जाओ कि उनको
भुलाने का इरादा कर लिया है

Tuesday, June 3, 2014

तेरे टूटते वादे, शर्मसार करते हैं
और फिर भरोसे को तार-तार करते हैं

यह जो सब सितारे हैं, रौशनी के धब्बे हैं
मख़मली  अँधेरे को दाग़दार करते हैं

ख़ामियां व ऐब उनके, दुश्मनों को बतलाओ
हम न  कुछ सुनेंगे, हम उनसे  प्यार करते हैं

हमको छोड़ जाने का उनको ग़म नहीं लेकिन
ग़र मिलें तो कहना हम इंतज़ार करते हैं

चाहतों का जीते-जी क्या सुबूत दें हम, बस
 तुमसे प्यार करते हैं, बेशुमार करते हैं 


Friday, March 7, 2014

उसने माँगा है इक  वचन फिर से
हम भी रख लेंगे उसका मन फिर से

शुक्र मानें कि आप जुगनू हैं
लग गया चाँद  ग्रहन फिर से

कोई जाकर ख़िज़ाँ बुला लाओ
खिल के तैयार है चमन फिर से

मेरी ग़लती पे उसकी ख़ामोशी
रख गई दिल पे इक वज़न फिर से

ज़ेहन-ओ-दिल फिर से लड़ पड़े मेरे
सख्त मुश्किल में है बदन फिर से

उसका भी मन है मान जाने का
हम भी कर कर लेते हैं जतन फिर से

फिर मुहाजिर कहा गया हमको
मिलके रोयेंगे हम-वतन फिर से